

भारत में ज्यादातर महिलाएं किसान है जो किसानो की कुल संख्या का लगभग ५२ प्रतिशत है और इस प्रकार से भारत में महिलाओं का कृषि में योगदान काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है । वे उत्पादों के उत्पादन संरक्षक, संवर्धन से लेकर उनके समुचित उपयोग तक की सभी गतिविधियों पूर्ण योगदान देती हैं । कृषि को आधुनिक एवं महिलायों को स्वावलंबी बनाने हेतु आवश्यक है की कृषक महिलाओं को उन तक सरल एवं सुबोध भाषाओं में आधुनिक ज्ञान कराया जाय ।
कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की अनेक समस्याएं है जैसे महिलाओं और पुरुषों के लिए समान मजदूरी की दरों का निर्धारण न होना, कृषि में कुछ औजार जिनको इस्तेमाल करने में बहुत श्रम करना पड़ता है ये महिलाओं की शारीरिक संरचनाओं के लिए उपयुक्त नही होते व इनके इस्तमाल से भी महिलाओं के स्वास्थ सम्बन्धी समस्याएं बढती है ग्रामीर्ण भारत के अंदरूनी हिस्सों में आधुनिक कृषि उपकरणों का उपलब्ध न पाना भी कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए एक बड़ी समस्या है ।
नई कृषि तकनीक के विकास में खेतीहर महिला श्रमिकों को कार्य करने की सुविधा हेतु एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कृषि यंत्रों की डिजाइनों में महिलाओं की शारीरिक संरचना का ध्यान रखा गया है और उन्हें इस तरह से विकसित किया गया है जिससे वे महिलाओं के लिए उपयुक्त साबित हो और उनके स्वास्थ्य पर यंत्रों का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े । इसी तारतम्य में कृषि विज्ञानं केन्द्र, सिवनी द्वारा महिलाओं की कृषि सुरक्षित भागीदारी हेतु केत्रिय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) भोपाल द्वारा महिलाओं के लिए विकसित कृषि यंत्रों का प्रदर्शन "स्वयं करके और सीखो" वाली सध्दान्तिक विधि का प्रयोग कर ग्राम जमुनिया , काटलबोदी , झीलापिपरिया , सिमरिया के गांवों में किया गया जिसमे प्रमुखता से सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण हेतु व्हील हो, का प्रयोग , मक्के दाने करो प्रथाकरण तूव्लर मशीन द्वारा , सोयाबीन की कटाई दांतेदार हसिये द्वारा एवं पौष्टिक सब्जियों की वागवानी प्रमुख है ।
इन प्रदर्शनों के माध्यम से खेती हर महिलाओं में साहस व आत्म विश्वास के साथ - साथ कार्यक्षमता में करीब ४० प्रतिशत का विकास हुआ है एवं यंत्रों द्वारा अवलोकन कर महिलाओं द्वारा लगभग ३० प्रतिशत थकावट का कम अनुभव हुआ एवं समय बीमा का भी लाभ हुआ तथा यन्त्र उनके अनुरूप पाया गया । इन प्रदर्शनों के साथ - साथ महिला कृषकों को कृषि यन्त्र प्रशिक्षण खाद्य पर आधारित व्यवसायिक प्रशिक्षण , विश्व खाद्य दिवस पर प्रशिक्षण दिया गया ।
महिलाओं का शारीरिक श्रम कम हो तथा उनकी कार्य कुशलता बढ़ सके इसके लिए विभिन्न उपकरणों की पहचान एवं प्रशिक्षण के द्वारा महिलाओं की कार्य क्षमता को बढ़ा सकते है एवं यही परंपरागत एवं उन्नत उपकरणों में तुलनात्मक अध्ययन करके हमें अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते है एवं दिशा में कृषि विज्ञानं केन्द्र नई जानकारी एवं प्रदर्शन के साथ अग्रसर है ।
कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की अनेक समस्याएं है जैसे महिलाओं और पुरुषों के लिए समान मजदूरी की दरों का निर्धारण न होना, कृषि में कुछ औजार जिनको इस्तेमाल करने में बहुत श्रम करना पड़ता है ये महिलाओं की शारीरिक संरचनाओं के लिए उपयुक्त नही होते व इनके इस्तमाल से भी महिलाओं के स्वास्थ सम्बन्धी समस्याएं बढती है ग्रामीर्ण भारत के अंदरूनी हिस्सों में आधुनिक कृषि उपकरणों का उपलब्ध न पाना भी कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए एक बड़ी समस्या है ।
नई कृषि तकनीक के विकास में खेतीहर महिला श्रमिकों को कार्य करने की सुविधा हेतु एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कृषि यंत्रों की डिजाइनों में महिलाओं की शारीरिक संरचना का ध्यान रखा गया है और उन्हें इस तरह से विकसित किया गया है जिससे वे महिलाओं के लिए उपयुक्त साबित हो और उनके स्वास्थ्य पर यंत्रों का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े । इसी तारतम्य में कृषि विज्ञानं केन्द्र, सिवनी द्वारा महिलाओं की कृषि सुरक्षित भागीदारी हेतु केत्रिय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) भोपाल द्वारा महिलाओं के लिए विकसित कृषि यंत्रों का प्रदर्शन "स्वयं करके और सीखो" वाली सध्दान्तिक विधि का प्रयोग कर ग्राम जमुनिया , काटलबोदी , झीलापिपरिया , सिमरिया के गांवों में किया गया जिसमे प्रमुखता से सोयाबीन में खरपतवार नियंत्रण हेतु व्हील हो, का प्रयोग , मक्के दाने करो प्रथाकरण तूव्लर मशीन द्वारा , सोयाबीन की कटाई दांतेदार हसिये द्वारा एवं पौष्टिक सब्जियों की वागवानी प्रमुख है ।
इन प्रदर्शनों के माध्यम से खेती हर महिलाओं में साहस व आत्म विश्वास के साथ - साथ कार्यक्षमता में करीब ४० प्रतिशत का विकास हुआ है एवं यंत्रों द्वारा अवलोकन कर महिलाओं द्वारा लगभग ३० प्रतिशत थकावट का कम अनुभव हुआ एवं समय बीमा का भी लाभ हुआ तथा यन्त्र उनके अनुरूप पाया गया । इन प्रदर्शनों के साथ - साथ महिला कृषकों को कृषि यन्त्र प्रशिक्षण खाद्य पर आधारित व्यवसायिक प्रशिक्षण , विश्व खाद्य दिवस पर प्रशिक्षण दिया गया ।
महिलाओं का शारीरिक श्रम कम हो तथा उनकी कार्य कुशलता बढ़ सके इसके लिए विभिन्न उपकरणों की पहचान एवं प्रशिक्षण के द्वारा महिलाओं की कार्य क्षमता को बढ़ा सकते है एवं यही परंपरागत एवं उन्नत उपकरणों में तुलनात्मक अध्ययन करके हमें अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते है एवं दिशा में कृषि विज्ञानं केन्द्र नई जानकारी एवं प्रदर्शन के साथ अग्रसर है ।
संकलन - ध्रुव श्रीवास्तव एवं एन.के.सिंह
Good Photographs and very good report.
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